Shayari – 13


ज़िन्दगी और जीवन में भी कोई फर्क है क्या ?

शायद हो भी सकता है।

कहीं ऐसा तो नहीं …

ज़िन्दगी वो है जो हम सोचते हैं और जीवन वो है जो हम जीते हैं।

  • Ashish Kumar

24 thoughts on “Shayari – 13

  1. पर जीवन को उर्दू में जिन्दगी ही तो कहते हैं,अंतर बस इतना है-जीवन तो सभी जीते हैं और जिन्दगी अपनी सी लगती है।

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      1. नहीं कोई फरक नही है।सोचने की बात ही नही।जैसे-जीवन के सफर मे राही मिलते हैं बिछड़ जाने को…..या यूं कह लो – जिन्दगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मकाम वो फिर नहीं आते….

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