Corona Virus – Pandemic


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World is under clouds of coming depression.
Mankind is currently facing stiff corona situation.
The battle between death and survival.
Featuring the startling pandemic arrival.
Arrival of a deadly disease across the globe.
Corona virus has shattered all the hope.
Who will survive nobody knows?
How many will die we rarely know?
Let’s be alert in our day to life.
To make Corona die.
It’s a pandemic we must realize.
Follow the lock-down in order to survive.
Being impatient will never serve the corona battle.
On the contrary, it won’t allow corona to settle.
There are many who carry the “hubris” attitude.
It’s time to bury such “debris” attitude.
Pandemic occurs rarely but shatters many.
Bringing clouds of fear, depression and many.
Let’s pray to almighty to normalize the current scenario.
Mankind must stand again to bring another portfolio.
Awareness, alertness and discipline are required in this pandemic.
Everyone should come together and not panic.
We can win this battle of corona jointly.
This cannot be curbed personally.
Some are playing filthy regional and religious politics.
They must remember…
The virus attacks without caste, creed, region and religion.
Everyone should unite…
Irrespective of their caste, creed, region and religion.

– Ashish Kumar

कोरोना, तांडव करो न…


दुनिया में आयी एक ऐसी महामारी |
हर जगह मच गयी त्राहि त्राहि |
मानव हो रहे बेचैन और परेशान |
एक सूख्म जीव ने कर दिया विश्व को हैरान |
खतरों से खेलने वाले आज खतरे में हैं |
लाखों लोग इस से प्रभावित हो रहे हैं |
कहते हैं इसे जग में कोरोरना |
अब और तांडव मत करो न |

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इस महामारी का अब तक कोई तोड़ नहीं |
कितनों को ले डूबेगी पता नहीं |
अचाननक शुरू हुई जुंग कब ख़त्म होगी ?
कोरोना से राहत कब मिलेगी ?
लाशों का अम्बार लगा दिया इसने |
इटली, स्पेन, इंग्लैंड और अमेरिका में |
समझ नहीं आ रहा ये सब क्यों हुआ ?
चीन से शुरू हुआ और विश्व को बर्बाद किया |
कौन ज़िम्मेदार है इस भयावह नज़ारे की |
लाशों का ढेर है खरीददार कोई नहीं |
ज़मीन काम पर रही लाशों को दफ़नाने में |
रूहें काँप रही हैं इस खौफनाक मंज़र में |
कहते हैं इसे जग में कोरोना |
अब और तांडव मत करो न |

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कुछ बुद्धिजीवों को इकॉनमी की पड़ी है |
लोग मर रहे हैं उनकी सुध नहीं है |
धंधे में नुक्सान की पड़ी है |
आर्थिक इस्थ्ती तो फिर से सुधर जाएगी |
इंसान बचेंगे तभी इकॉनमी रहेगी |
कालाबाज़ारी में मुनाफे की दुकान चला रहे हैं कुछ |
इंसानियत भूल कर अनाज का कत्लेआम कर रहे हैं कुछ |
लड़ाई लम्बी है और लड़ना है |
साथ मिल के इस जंग को जीतना है |
ईश्वर से यही प्राथना है …
कहते हैं इसे जग में कोरोना |
अब और तांडव मत करो न…

– Ashish Kumar