Shayari – 3


नींद तो आती है पर नींद होती नहीं।

सुबह तो होती है पर सुबह आती नहीं।

Ashish Kumar

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Shayari – 2


ज़िन्दगी इक किताब है।

अभी तो आपने सिर्फ कवर पेज देखी है।

Ashish Kumar

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Shayari – 1



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अल्फ़ाज़ बयां करते हैं बहुत कुछ।

खामोशी बयां करती है सब कुछ।

तुम्हारी खामोशी बता रही है मुझे।

तुम्हारी मुस्कुराहट केह रही है।

शायद मैं हो गया हूं तुम्हारा अब सब कुछ।

Ashish Kumar

इक शुरुवात


आप सबके समकक्ष कर रहा हूं मैं इक शुरुवात।

उम्मीद है पसंद आयेगी मेरी नई लेखनी अंदाज़।

प्यार, व्यंग्य और सामाजिक विषयों को छूते हुए।

आपके चेहरे पर हल्की मुस्कान लाते हुए।

ला रहा हूं मैं आपके समकक्ष अपनी नई किलकारी।

उम्मीद है पसंद आएगी आपको मेरी शायारी।

Ashish Kumar