कुछ करते हैं …


कुछ करते हैं |
ख्वाबों को हटा के |
ग़मों को भुला के |
नयी राह बना के |
ज़िन्दगी में आगे बढ़ते हैं |
चलो कुछ करते हैं |

कुछ करते हैं |
दुःख के पलों को चोर के |
अनचाही यादों को जला के |
किस्मत के मार को हरा के |
नयी रौशनी तलाशते हैं |
चलो कुछ करते हैं |

कुछ करते हैं |
दिल की आवाज़ सुन के |
दूसरों के दुखों को मिटा के |
अपने आप से बात कर के |
ज़िन्दगी का मज़ा लेते हैं |
चलो कुछ करते हैं |

कुछ करते हैं |
बिगड़ी किस्मत को बदल के |
ऐसी राह पकड़ते हैं |
तूफ़ान भी घबरा जाये |
ऐसा कुछ सोचते हैं |
मौसम के हर मिजाज को |
मुश्किलों को हरा के |
खुद पे भरोसा रख के |
विश्वास का दामन थाम के |
ज़िन्दगी से लरते हैं |
चलो कुछ करते हैं |
चलो कुछ करते हैं |

– Ashish Kumar

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अच्छा लगता है.


वो तुम्हारा अचानक से चले जाना.
जाके फिर वापस आना.
नुका छुपी खेल के मुझे सतना.
मुझसे नाराज़ हो कर मुझे रुलाना.
अच्छा लगता है.
बहुत अच्छा लगता है.

वो तुम्हारा गुस्से से मुस्कुराना.
दिल मे मेरे हमेशा के लिए बस जाना.
सुबह शाम होने का एहसास दिलाना.
हमेशा के लिए मेरा हो जाना.
अच्छा लगता है.
बहुत अच्छा लगता है.

तुम्हारी धड़कानों मे मेरा होना.
होठों का अचानक से सिसकना.
दिल की बात दिल मे रखना.
ज़ुबान से कुछ ओर ही कहना.
अच्छा लगता है.
बहुत अच्छा लगता है.

छोर दिया है मैने सब कुछ.
तुम ही हो मेरा अब सब कुछ.
साथ ना छोड़ूँगा तुम्हारा.
बस मेरी हो के रहना.
वो तुम्हारा आँखों से इशारा करना.
कभी घूर के मुझे देखना.
तुमसे बात करना, तुम्हे सतना.
तुम्हारी यादों मे खोए रहना.
अच्छा लगता है.
अच्छा लगता है.

– Ashish Kumar

सच्चे दिल से |


कल तुम्हे देखा था मैने |
कुछ इस नज़र से |
जैसे चाहने लगा हूँ तुम्हे |
सच्चे दिल से |
तुम्हारे चेहरे से झलकती मासूमियत |
मुझे खींचती है तुम्हारी ओर |
तुम्हारे होठों का सिसकना |
मुझे ले जाता है तुम्हारी ओर |
भूल जाता हूँ मैं सारे ग़म |
मैं और तुम अब बन जाए “हम” |

चेहरे पे असमंजस है ,
पर दिल मे कुछ और है |
ज़बान कुछ कहती है ,
पर आँखों मे कुछ और ही है |
साफ झलकता है प्यार ,
तुम्हारी आँखों से |
होठों की कश्मकश वो बताती है,
जो महसूस करती हो तुम…
अपने दिल की धड़कनो मे |

जब तुम पास रहती हो,
अछा लगता है |
दूर जाने की बात करके तुम,
मुझे क्यूँ सताती हो |
रूको कहो अपने दिल की |
सुन लो कुछ…
मेरे भी दिल की |
तुम्हारी नज़र कहती है,
मैं तुम्हारा हूँ |
मैं कहता हूँ की…
तुम मेरी हो |
तुम चाहती हो इस कदर से |
पर रोकती हो दिल को अपनी ज़ुबान से |
अब खेलना बंद करो |
कहना है जो सो कह दो |
रोको न खुद को मुझसे |
क्यूंकी…
चाहता हूँ मैं तुम्हे |
सच्चे दिल से…
सच्चे दिल से…

– Ashish Kumar

लिखते जा |


कुछ लिखने का जी करता है |
क्या लिखूं समझ नहीं आता है |
काम करते करते तन और मन थक जाता है |
फिर भी दिल लिखने को कहता है |
दिल को कैसे समझाऊं जो हर वक़्त धड़कता है |
पर तन और मन आराम करना चाहता है |
मन कहता है सो जा |
दिल कहता है लिखते जा…

writer2

समय का चक्र तो हमेशा चलता है |
पर मनुष्य का जीवन तो रुकता है |
ज़िंदगी मे कई लोगों से मिलना होता है |
पर लिखने के लिए खुद से बात करना परता है |
लिखकर अत्यंत आनंद प्राप्त होता है |
लिखने के बाद मन भी खुश हो जाता है |
पर फिर भी ये लिखने से रोकता है |
मन कहता है सो जा  |
पर दिल कहता है लिखते जा |
और लिखते जा …

 – Ashish Kumar

अकेलापन |


अकेलेपन का अपना ही अलग मज़ा है |
लोग क्यूँ कहते इसे एक सज़ा है |
अपने आप से बात करने का मौका मिलता है |
खुद को परखने का अवसर दिखता है |

सब से बात करके अब खुद से बात करना चाहिए.
अकेलेपन का कुछ फायदा तो उठाना चाहिए.
किया बहुत सबने चिंतन और मनन.
अब करते हैं कुछ आत्म मंथन.

अकेले रहना कोई नही चाहता |
जो चाहिए वो हमेशा नही मिलता |
जब कभी अकेले होने का एहसास होता है |
दिल सिसकता है और रोता है |
अकेलेपन मे कोई अपना नही होता है |
पर ये भी सच है…
अकेले रहकर अकेलेपन को मारने मे मज़ा बहुत आता है |
मज़ा बहुत आता है…

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– Ashish Kumar