Very few…



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The playground of life is crucial.
Attack from every side is sometimes lethal.
Fear of outcome always stops from being creative.
Willingly or unwillingly, majority become defensive.
All are moving and following the crowd.
At the end, most are lost in the crowd.
Life is no more peaceful in this chasing world.
Noise and pain are the main glimpses of this world.
Everyone pretends to be fully intelligent.
That’s the root cause of situation becoming belligerent.
Being calm and polite is rare characteristics of humans.
Outrageous nature can be easily found in humans.
“I know everything” is the general and acceptable truth.
But looking at the other side, lies the bitter truth.
“Very few” people know that they really know “very few”…

– Ashish Kumar

Delicate Smile


When you gives your delicate smile.
Even the stone breaks with a smile.
Staring look from your face.
Makes me to always look on your face.

The opening of your mouth for talk.
Makes the way for never ending talk.
Sometimes giving a devastating look.
Makes me to have a forever look.

When you make me laugh loud.
That time I really feel proud.
Holding your hands for walk and talk.
I forget the journey of long walk.

The trust binds us forever.
Not aware whether we are made for each other.
As one day we will be detached.
Death is the ultimate truth.
I will miss you…
Your void will be felt.
Only memories will be kept.
Will miss your delicate smile.
Which compels even mountains to dance and joy.
As…
When you gives your delicate smile.
Even the stone breaks with a smile.

smile

– Ashish Kumar

…एक छोटी सी फरियाद|…


एक छोटी सी फरियाद करता हूँ मैं तुझसे भगवान|
कुछ नही बस बना दो इंसान को अब इंसान |
शामों सुबह दिखती है सिर्फ़ नफ़रत की पाठशाला |
हर जगह मिलता है मंज़र हैरान कर देने वाला |
एक छोटी सी फरियाद करता हूँ मैं तुझसे भगवान |
कुछ नही बस बना दो इंसान को अब इंसान |

भीड़ मे सिर्फ़ चेहरे दिखाई देते हैं |
इंसान ही एक दूसरे के दुश्मन बने फिरते हैं |
बन गयी दुनिया एक ऐसा बाज़ार |
जहाँ सब कुछ हो रहा है तार तार |
एक छोटी सी फरियाद करता हूँ मैं तुझसे भगवान |
कुछ नही बस बना दो इंसान को अब इंसान |

wish

भक्ति भी गयी और देशभक्ति भी गयी |
मानवता सोई की सोई ही रह गयी |
आँखो से तो प्रकृति की सुंदरता दिखाई देती है |
बुरे कर्म इतने हैं की उसकी सुंदरता भी फीकी नज़र आती है |
एक छोटी सी फरियाद करता हूँ मैं तुझसे भगवान |
कुछ नही बस बना दो इंसान को अब इंसान |

घाव पर नमक छिरकने का कारवाँ बढ़ता ही जा रहा है |
अपनी ही जनँनी की दूध मे ज़हर मिलने का क्रम चलता जा रहा है |
धरती भी कांपति है ऐसी वातावरण को देखकर |
चुप रह जाती है वो सिर्फ़ और सिर्फ़ खुद को कोसकर |
बदले की आग मे जल के लोग बदल गये |
इंसान के बदले हैवान बन गये |
भूल गये सब धर्म और कर्म |
नहीं रहा किसी मे अब कोई मर्म |
इंसानियत गयी मानवता चकनाचूर हो गयी |
दया और नेकी काफूर हो गयी |
इसलिए…
एक छोटी सी फरियाद करता हूँ मैं तुझसे भगवान |
कुछ नही बस बना दो इंसान को अब इंसान |

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Note : This is the 75th post of this blog… 🙂

 – Ashish Kumar

…YOU CONTINUED TO LIE…


In the deep of your heart.
There is a presence of mine.
You never accepted the truth.
And continued to lie.

Even your soul knows your situation.
You always avoid to have the attention.
Giving always the fake smile.
And…
From the mouth.
You continued to lie.

You know I know.
What else do we need to know.
Have nothing to hide.
Come, we will walk side by side.
Invited you for that walk and talk.
You said yes from soul and heart.
But…
From the mouth.
You still continued to lie…

Sad-Sunflower

– Ashish Kumar

ज़िन्दगी का खेल ।


ज़िन्दगी की रीत है ये पुरानी । 
खेल खेलती है ये बरी सयानी । 
कभी मिलाती है तो कभी छुपाती है । 
हर बार ये क्यूँ इतना सताती है । 
                       नया चेहरा नए लोग मिलते हैं । 
                     कारवां पीछे रह जाते हैं । 
                       मिल के बिछरने का नियम किसने है बनाया । 
                     अगर बिछरना ही था तो उसने हमें क्यों मिलाया । 
              
खोने का खौफ ही सताता है । 
फिर भी किसी को कोई क्यूँ चाहता है । 
जुदा होने का तकलीफ बहुत होता है । 
साथ छूटने का ग़म बड़ा रुलाता है । 
                          ये ज़िन्दगी का चक्र है । 
                          ये तो चलता रहेगा । 
                        अच्छा हो या बुरा । 
                         सत्य तो स्वीकारना पड़ेगा । 
ज़िन्दगी के हर मोड़ पर है एक कहानी । 
खेल खेलती है ये बड़ी सयानी । 
मौसम की  तरह ये है रंग बदलती । 
येही ज़िन्दगी है जो हर वक्त करवट है बदलती । 
                         life
  आशीष कुमार