अच्छा लगता है.


वो तुम्हारा अचानक से चले जाना.
जाके फिर वापस आना.
नुका छुपी खेल के मुझे सतना.
मुझसे नाराज़ हो कर मुझे रुलाना.
अच्छा लगता है.
बहुत अच्छा लगता है.

वो तुम्हारा गुस्से से मुस्कुराना.
दिल मे मेरे हमेशा के लिए बस जाना.
सुबह शाम होने का एहसास दिलाना.
हमेशा के लिए मेरा हो जाना.
अच्छा लगता है.
बहुत अच्छा लगता है.

तुम्हारी धड़कानों मे मेरा होना.
होठों का अचानक से सिसकना.
दिल की बात दिल मे रखना.
ज़ुबान से कुछ ओर ही कहना.
अच्छा लगता है.
बहुत अच्छा लगता है.

छोर दिया है मैने सब कुछ.
तुम ही हो मेरा अब सब कुछ.
साथ ना छोड़ूँगा तुम्हारा.
बस मेरी हो के रहना.
वो तुम्हारा आँखों से इशारा करना.
कभी घूर के मुझे देखना.
तुमसे बात करना, तुम्हे सतना.
तुम्हारी यादों मे खोए रहना.
अच्छा लगता है.
अच्छा लगता है.

– Ashish Kumar

सच्चे दिल से |


कल तुम्हे देखा था मैने |
कुछ इस नज़र से |
जैसे चाहने लगा हूँ तुम्हे |
सच्चे दिल से |
तुम्हारे चेहरे से झलकती मासूमियत |
मुझे खींचती है तुम्हारी ओर |
तुम्हारे होठों का सिसकना |
मुझे ले जाता है तुम्हारी ओर |
भूल जाता हूँ मैं सारे ग़म |
मैं और तुम अब बन जाए “हम” |

चेहरे पे असमंजस है ,
पर दिल मे कुछ और है |
ज़बान कुछ कहती है ,
पर आँखों मे कुछ और ही है |
साफ झलकता है प्यार ,
तुम्हारी आँखों से |
होठों की कश्मकश वो बताती है,
जो महसूस करती हो तुम…
अपने दिल की धड़कनो मे |

जब तुम पास रहती हो,
अछा लगता है |
दूर जाने की बात करके तुम,
मुझे क्यूँ सताती हो |
रूको कहो अपने दिल की |
सुन लो कुछ…
मेरे भी दिल की |
तुम्हारी नज़र कहती है,
मैं तुम्हारा हूँ |
मैं कहता हूँ की…
तुम मेरी हो |
तुम चाहती हो इस कदर से |
पर रोकती हो दिल को अपनी ज़ुबान से |
अब खेलना बंद करो |
कहना है जो सो कह दो |
रोको न खुद को मुझसे |
क्यूंकी…
चाहता हूँ मैं तुम्हे |
सच्चे दिल से…
सच्चे दिल से…

– Ashish Kumar

Blogger Interview Tag


My friend Neha of FORGOTTENMEADOWS, nominated me for this challenge. This is the first time I am taking up the challenge. I would like to thank her for considering me for the same.  Neha is a brilliant writer whose poems will make you speechless. Her posts are beautiful and when it comes to short poems, its better to say she is the master of short poems. Do visit her blog for amazing literary pieces. 🙂

blogger interview tag

Here are the rules:

* Mention the person who tagged you.
* Answer the questions in full.
* Don’t forget to tag up to ten other bloggers at the end.

Here are the questions and their answers:

How did you get into blogging?  

I wrote my first poem which was in Hindi when I was in class IX and again a Hindi poem in class X but unfortunately I lost both of the poem which I was unable to preserve. Due to that anger I stopped writing for two years. 🙂 But there was always a voice coming from inside to write. So I started writing again when I entered college for persuading engineering and initially I wrote in notes on facebook for few months and was getting reviews there. I created my blog in February 2011 from one of my friend suggestion without knowing what a blog is. I posted my first post in April. 😦  My  Hello World post which is default is still active and have preserved it yet and will be preserved in future too. 🙂  I was not posting frequently and there have been big gaps of 6 months also but slowly and slowly I learnt what is blogging and how to use it and  I am here and just want to continue this journey as much as  I can. 🙂

What advice would you give to a blogger just starting out?

I don’t consider myself in a position to give advice to novice blogger’s as I am not a veteran. I am a novice and still in learning phase, just learning from many prominent bloggers.

What would be your dream campaign?

Spreading awareness regarding your  own inner strength which people usually fail to recognise.

Do you have a plan for your blog?

I don’t have any specific plan as of now. Just wanted to keep going and share among you all the wonderful and respected bloggers.

What do you think about rankings?

I think every literary piece is having something special in it. Writing is a creativity and every literary piece is unique and has something to offer.

Following are the nominees for this interview challenge:

All the nominees are free to accept/reject the interview tag. The above nominations are not in any particular order. Hope to have your response. Happy blogging!… 🙂

Ashish Kumar

लिखते जा |


कुछ लिखने का जी करता है |
क्या लिखूं समझ नहीं आता है |
काम करते करते तन और मन थक जाता है |
फिर भी दिल लिखने को कहता है |
दिल को कैसे समझाऊं जो हर वक़्त धड़कता है |
पर तन और मन आराम करना चाहता है |
मन कहता है सो जा |
दिल कहता है लिखते जा…

writer2

समय का चक्र तो हमेशा चलता है |
पर मनुष्य का जीवन तो रुकता है |
ज़िंदगी मे कई लोगों से मिलना होता है |
पर लिखने के लिए खुद से बात करना परता है |
लिखकर अत्यंत आनंद प्राप्त होता है |
लिखने के बाद मन भी खुश हो जाता है |
पर फिर भी ये लिखने से रोकता है |
मन कहता है सो जा  |
पर दिल कहता है लिखते जा |
और लिखते जा …

 – Ashish Kumar

अकेलापन |


अकेलेपन का अपना ही अलग मज़ा है |
लोग क्यूँ कहते इसे एक सज़ा है |
अपने आप से बात करने का मौका मिलता है |
खुद को परखने का अवसर दिखता है |

सब से बात करके अब खुद से बात करना चाहिए.
अकेलेपन का कुछ फायदा तो उठाना चाहिए.
किया बहुत सबने चिंतन और मनन.
अब करते हैं कुछ आत्म मंथन.

अकेले रहना कोई नही चाहता |
जो चाहिए वो हमेशा नही मिलता |
जब कभी अकेले होने का एहसास होता है |
दिल सिसकता है और रोता है |
अकेलेपन मे कोई अपना नही होता है |
पर ये भी सच है…
अकेले रहकर अकेलेपन को मारने मे मज़ा बहुत आता है |
मज़ा बहुत आता है…

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– Ashish Kumar