बात


बात सिर्फ इतनी है, कि बात कुछ भी नहीं।

बस यही बात है, जो मुसीबत की जड़ है।

इसी बात में, गौण हो रहे जज़्बात।

मालूम नहीं कैसे, बिगड़ जाते हालात।

बात सिर्फ इतनी है, कि बात कुछ भी नहीं।

हमारी सब सुने, पर हम किसी की नहीं।

अहंकार में लिप्त हुई, इंसान की सोच।

अपनापन हमदर्दी छोड़, हो रहे सब मदहोश।

बात सिर्फ इतनी है, कि बात कुछ भी नहीं।

कहते हैं जिसे इंसान, पर वो इंसान नहीं।

मानव निर्मित हथियार और मिसाइल ने,

सिर्फ मानव को ही मारा।

कितने घर किए बर्बाद, और कितनों को उजाड़ा।

इस कदर बार बार, मानवता को ही मारा।

हमने मिसाइल तो बनाया, पर “मिसाल” कब बनेंगे?

इस अंधे दौड़ से, बाहर कब निकलेंगे?

बात सिर्फ इतनी है, कि बात कुछ भी नहीं।

मैं ही सिर्फ सत्य हूं, और बाकी कुछ नहीं।

असल सत्य जो है वो “मैं” नहीं,

और “मैं” जो है वो सत्य नहीं।

यही बात है जो समझनी है।

बात सिर्फ इतनी है, कि बात कुछ भी नहीं।

बात सिर्फ इतनी है, कि बात कुछ भी नहीं।

Ashish Kumar

Earn and earned…


Reluctant to accept fault.

One is not perfect by default.

Ignoring the truth aside.

Seems one has achieved pride.

Fake sense of sensing proud.

Surrounded by…

Opening mouth, always loud.

Reject everything of relevance.

Taking unnecessary vengeance.

Disrespect all and want respect in return.

One can get awe but no “respect” in return.

As…

Respect and blessings are earned with humble attitude.

Curse is earned with insolent attitude.

Curse is earned with insolent attitude.

Stop and think…

What should I earn?

what have I earned?

Is it awe and curse?

Or…

Is it respect and blessings?

Ashish Kumar

Surface of Illusion…


Top post on IndiBlogger, the biggest community of Indian Bloggers

In the playground full of noise and crowd.

Unpleasant experience coming all around.

Passing the buck is so common now.

Everyone pretends to be perfect now.

What make them perfect is an illusion.

Perfection comes from introspection.

Self-claim is the new phenomenon.

I am right always…

You are wrong always…

I know everything…

You know nothing…

What makes them so confident?

It can be…

A hollow surface of illusion.

Surrounded by…

Barking words and fake illustration.

Having their feet above air,

Seems they reside in exosphere.

Once they fall,

They may fall inside earth’s inner core.

Rising above that is not possible.

As entire life, they did which was not feasible.

World is surrounded by such illusionary people.

Such illusion is an illusion.

Reality is different.

As…

Those who pretends to know everything knows nothing.

-Ashish Kumar

आँखे देखें सब सत्य…


आँखे देखें सब सत्य , पर मन मैला हो जाये।
इस मलीन मन को अब , कौन कैसे जलाये ?


ज़िन्दगी के समर में , आग उगलता इंसान।
इस आग में आखिर जल रहा , सिर्फ और सिर्फ इंसान।
शून्य हुआ संसार , मानव के बाजार में।
मिट रही मानवता , मानव निर्मित संसार में।
थम गयी है ज़िन्दगी , आज के इस दौर में।
सांसे रूकती जा रही , इस प्रदूषित अंधकार में।
सत्य स्वीकार्य नहीं , इस दूषित समाज में।
सब खुद ही सत्य हैं , इस अनोखे दौर में।
सब कुछ पाया हमने , इस भौतिक दुनिया में।
खोया तो सिर्फ इंसानियत , इंसानो की दुनिया में।
हंसी , ख़ुशी और अपनापन , सब लिप्त हो रही।
संघर्ष के इस काल में , आँखें मूँद हो रही।


फिर भी हम हैं आज , खुद को कुछ बदलना होगा।
इस नयी चुनौती से , अब मिलकर निपटना होगा।
मलीन मन को अब , दूषित नहीं करना है।
जो गलती जिससे हुई सो हुई , अब उठना है और बढ़ना है।
इस मंज़र को बदलना है , अब भी वक़्त है।
अंतर्मन की आवाज़ से , साथ मिलकर लड़ना है।
ज़रूरी है इस सत्य को समझने की …
आँखें देखे सब सत्य , पर मन मैला हो जाये।
इस मलीन मन को अब , कौन किसे जलाये ?

-Ashish Kumar

Hunch


Opened eyes with some hope.
With sign of having a positive course.
Looking inside for a while,
Do I have a remorse?
Culprit of common criticism.
It is a cynicism.
Fake suggestions and cacophony surrounded.
Forbidding them as they were counterfeited.
Took a pause and moved on.
My inner light was on.
No one can snatch my own self.
Being made of rock stone shed.
But one thought always taunts.
Barking people surrounded everywhere.
People are becoming “vulture”?
Is it real or a hunch? 

- Ashish Kumar