आँखे देखें सब सत्य…


आँखे देखें सब सत्य , पर मन मैला हो जाये।
इस मलीन मन को अब , कौन कैसे जलाये ?


ज़िन्दगी के समर में , आग उगलता इंसान।
इस आग में आखिर जल रहा , सिर्फ और सिर्फ इंसान।
शून्य हुआ संसार , मानव के बाजार में।
मिट रही मानवता , मानव निर्मित संसार में।
थम गयी है ज़िन्दगी , आज के इस दौर में।
सांसे रूकती जा रही , इस प्रदूषित अंधकार में।
सत्य स्वीकार्य नहीं , इस दूषित समाज में।
सब खुद ही सत्य हैं , इस अनोखे दौर में।
सब कुछ पाया हमने , इस भौतिक दुनिया में।
खोया तो सिर्फ इंसानियत , इंसानो की दुनिया में।
हंसी , ख़ुशी और अपनापन , सब लिप्त हो रही।
संघर्ष के इस काल में , आँखें मूँद हो रही।


फिर भी हम हैं आज , खुद को कुछ बदलना होगा।
इस नयी चुनौती से , अब मिलकर निपटना होगा।
मलीन मन को अब , दूषित नहीं करना है।
जो गलती जिससे हुई सो हुई , अब उठना है और बढ़ना है।
इस मंज़र को बदलना है , अब भी वक़्त है।
अंतर्मन की आवाज़ से , साथ मिलकर लड़ना है।
ज़रूरी है इस सत्य को समझने की …
आँखें देखे सब सत्य , पर मन मैला हो जाये।
इस मलीन मन को अब , कौन किसे जलाये ?

-Ashish Kumar

43 thoughts on “आँखे देखें सब सत्य…

    1. We can only pray for betterment to get rid of the current situation…
      Sad to know that you are sad but I am sure you possess the power to handle the situation at your end as I have always found a feeling of optimism and never giving up attitude in your writing including your book… And this is the reason I am optimistic about you to manage the trying situation at your end… Although I am not aware of the current condition with which you are going through sir, but I am confident enough about you to tackle it… Life is such… Full of ups and downs, full of happy and sad moments. Willingly or unwillingly, we have to handle… This too shall pass… Trust it…

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      1. Thank you so much for your vote of confidence Ashish.

        I am or was sad but am at peace. One good meditation and everything changes.

        God willing this phase shall pass soon 🙏 Ultimately it is all a dream 🙏

        With God’s grace all is well in our family but my concern is for the struggling humanity.

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        1. Relaxed to hear the same…Happy to know that you are at peace and all is well at your end… 🙂 Yes, the current situation is worrying and we are all waiting for betterment. We can only pray to get the things normal. Let’s not lose hope and wait for that “better” noon.. 🙂

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  1. बहुत सुन्दर लिखा आपने।

    हर किसी का मन अभी किसी न किसी तकलीफ मे है
    कोई रोता धन को तो कोई देह की तक्लीफ पर है
    आज दुनिया खुद एक दुखद परिस्थति में है
    बस दुआ यही है के सब को दुख से मुक्ति मिले।

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    1. Thank you so much mam for reading and appreciating the poem…

      सही कहा आपने। वर्तमान परिस्थिति हर किसी के अंदर एक भय का कारण बन गया है। सब तकलीफ से जूझ रहे हैं और बस यही प्रार्थना है की स्तिथि सामान्य हो जाए।

      बहुत बहुत धन्यवाद की अपको ये रचना पसंद आई। 🙏🤗

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  2. सुंदर! आज सकारात्मकता ज़रूरी है।तभी हिम्मत और हौसला से समस्या का सामना किया जा सकता है।

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  3. Lokesh Sastya

    इस मलीन मन को अब , कौन किसे जलाये ?

    ऊपर के यह शब्द मुझे एक चुनौती की तरह दिखाई देते है, जो शायद अपनाना आसान भी है। मन को मलीन होने से रोकना/बचाना जरूरी है, यह होगा तथ्यों की गहरी परख से और मानव संवेदना को महसुस करने से।

    मुझे गुस्सा आता है लोगो पर, मैं अपने किये पर पछताता हूँ और दूसरों की तरक्की से जलता है। हमें इस भुलभुलैया से बाहर निकलना ही होगा। हम दूसरों पर निर्भर होकर, अपने अंदर की आवाज़, कला, ऊर्जा, अनुभूति और प्रेरणा को भूल चुके है।

    अरे! तिनके-तिनके से घर बनाकर चिडियाँ घनघोर बारिश के मौसम को मात देती है। एक छोटी -सी, अपने से दूना वजन उठाती है। हम तो इंसान है, विवेकवान और समझदार है।

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    1. Sahi kaha apne Lokesh… Tathyon ki gehri parakh hona bahut avashyak hai tabhi man se andhkar khatm hoga aur sakaratmak vichar utpanna hoga… Bahut bahut dhanyawad padhne aur pasand karne ke liye…

      And I am extremely sorry for the late response which was missed from my side, inadvertently.. 😦

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