समय है कम…


समय है कम,
काम है बहुत ज़्यादा।
कैसे पूरा होगा ?
खुद से किया वादा।
जीवन के उतार चढाव में ,
इधर उधर भटकना।
रुकने का अब नाम नहीं ,
सिर्फ चलते रहना।
समय है कम ,
मुश्किलें है ज़्यादा।
कैसे पूरा होगा ?
खुद से किया वादा।
एक लौ जलाई है ,
जो बुझेगी नहीं।
आँधी, बारिश या तूफ़ान ही सही,
अब रुकेगी नहीं।
है ताकत इतनी इस चिंगारी में।
कभी पानी में आग लगाती,
तो कभी राख को जलाती है।
बेवक़्त , लगातार वो,
अब जल रही है।
समय है कम ,
काम है बहुत ज़्यादा।
कैसे पूरा होगा ?
खुद से किया वादा।

Ashish Kumar

19 thoughts on “समय है कम…

  1. Lokesh Sastya

    बहुत सुंदर रचना आशीष भाई| यह बात याद दिला कर, अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की जिज्ञासा, आपने मेरे अंदर बढा दी है।

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