इक चाहत |


तुम्हारी मुस्कुराहट को देखकर |
दिल तुम पे फ़िदा हो गया कुछ इस कदर |
बिन तुम्हारे अब कहीं और…
कुछ न आये नज़र ,
कुछ न आये नज़र |
तुम्हारी सादगी पे मरकर |
रातों की नींद को खोकर |
डूबा रहता हूँ तुम्हारे ख़यालों में अब …
शाम – ओ सेहर ,
शाम – ओ सेहर |
करता हूँ हर  वक़्त तुम्हारी पूजा |
क्यूंकि बिन तुम्हारे दूसरा कोई न दूजा |
ज़िन्दगी के हर  मोर पर साथ दूँगा तुम्हारा |
बनकर रहूँगा सदा मैं इक साथी प्यारा |
साथ चाहिए  तुम्हारा |
क्यूंकि कोई नहीं है हमारा |
हम तो करते हैं सिर्फ उस दिन का इंतज़ार |
जब तुमको हो जाये हमसे प्यार |
येही है मेरी बस  ” इक चाहत “ |

   – आशीष कुमार

15 thoughts on “इक चाहत |

  1. बहुत बहुत शुक्रिया इंदु मैम आपका जो अपने मेरी इस कोशिश को सराहा | मुझे काफी प्रसन्नता हुई | यूँही मेरा हौसला बढ़ाते रहिये |

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