आदत |


अकेले रहने की आदत हो गयी है |
 
तन्हाई में जीने की आदत हो गयी है |
 
सबको मदद करने की आदत हो गयी है |
 
नज़रंदाज़ी का शिकार होने की आदत हो गयी है |
 
अँधेरे में रौशनी तलाशने की आदत हो गयी है |
 
बार बार ग़म को भुलाने की आदत हो गयी है |
 
कांटो भरी रास्तों पर चलने की आदत हो गयी है |
 
घाव पर नमक लगवाने की आदत हो गयी है |
 
बनावटी मुस्कराहट देने की आदत हो गयी है |
 
बिना खुश रहने की आदत हो गयी है |
 
किसी से कोई उम्मीद न करने की आदत हो गयी है |
 
 
ये आदत कब जाएगी पता नहीं…
 
इक ” चाहत ” थी इस ” आदत ” से छुटकारा पाने की |
 
पर …
 
लगता है ये ” आदत ” अब मेरी इक बहुत बरी ” ताकत ” बन गयी हैं |
 
    – आशीष कुमार