इक दिया जला पानी में |


मुसलाधार बारिश के मौसम में |

चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी के आवागमन में |

डूबते हुए सारे सपनों के भंवर में |

इक दिया जला पानी में |

बादलों की गर्गाराहट में |

तेलों के अभाव में |

मुश्किलों के भवसागर में |

इक दिया जला पानी में |

खाबों की डूबती हुई नैय्या में |

रिश्तों के टूटते ज़ख्म में |

चोटिल हुए शरीर के अंग में |

फिर भी …

इक दिया जला पानी में |

सूरज की किरणों को देखकर |

आँखों में उम्मीद की लहरें फिर जाग उठी |

मन में अचानक इक ख्याल आया ,

क्यूँ न फिर से ” इक दिया जलाएं पानी में ” |

राह कठिन हैं बहुत |

मुश्किलें तो आएंगी |

सहना भी परता है बहुत |

सफलता तभी तो मिलेगी |

अंधेरों को चीरकर |

समंदर में दौड़कर |

रेगिस्तान में वर्षा लाकर |

आओ अब …

” इक दिया जलाएं पानी में “…

– आशीष कुमार