काश


काश कोई ऐसा सहारा होता जिसको पकड़कर मैँ जी भर कर रो पाता।

काश कोई ऐसा किनारा होता जहाँ बैठकर मैँ अपने आप से बातेँ करता।

काश मेरे साथ एक ऐसा धागा जुड़ा होता जो मेरे से कभी न जुदा होता।

काश कोई ऐसा घड़ा होता जहाँ मैँ अपने आँसुओ को सहेज कर रखता।

काश मैँ पानी मे रहता जहाँ मेरे आँसू को कोई न देख पाता।

काश मेरे साथ “भखवान” होता तो शायद ऐसा कभी न होता।

– आशीष कुमार